बुधवार, 22 सितंबर 2010

तुम्हारी आँखें

6 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत सुंदर यह गज़ल भी और हमदम की आँखें भी ।

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  2. बहुत ही प्यारी ग़ज़ल है....

    मैने यूं ही पूछ लिया क्या मैं ही हूं चाहत तेरी
    तेरा भी इजहार बसा है हमदम तेरी आंखों में

    कभी यहां भी आइए और ब्लॉग अच्छा लगे,मेरा ही नहीं किसी का भी तो उसे फॉलो कर हौसला बढ़ा सकते हैं

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  3. आशा जी, उड़न तश्तरी जी एवं वीना जी आपका बहुत-2 धन्यवाद। वीना जी आपकी बातों से पूरी तरह से सहमत हूँ। अभी आपके ब्लॉग का अनुसरण करता हूँ।

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